Home शायरीDesh Bhakti Shayari सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा Desh bhakti Hindi Shayari

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा Desh bhakti Hindi Shayari

by piyush Hindustani
Desh Bhakti Shayari सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तान हमारा एक हिन्दी उर्दू भाषा में लिखा गया एक देशभक्ति  गीत है जिसको प्रसिद्ध शायर मुहम्मद इक़बाल ने में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लिखा और यही Desh bhakti Shayari आगे चलकर ब्रिटिश राज के विरोध का एक प्रतीक बना जिसे आज भी देश-भक्ति के गीत के रूप में हिंदुस्तान में हर जगह गाया जाता है खाश तौर पर हिंदी भाषी छेत्रो में इस सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तान हमारा Desh Bhakti Hindi Shayari को बड़े जोश के साथ गया जाता है ।

इसे इक़बाल ने सबसे पहले सरकारी कालेज, लाहौर में पढ़कर सुनाया था। उस समय इक़बाल लाहौर के सरकारी कालेज में लेक्चरर थे। यह गीत सभी धर्मो के बीच भाई-चारे की भावना को प्रोत्साहित करता है। इस देशभक्ति शायरी गीत के लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की जब इंदिरा गांधी ने भारत के प्रथम अंतरिक्षयात्री राकेश शर्मा से पूछा कि भारत अंतरिक्ष से कैसा दिखता है, तो शर्मा ने इसी Desh bhakti Shayari को दोहराते हुए कहा सारे जहाँ से अच्छा हिन्दीस्तां हमारा

देशभक्ति शायरी हिन्दी | Patriotic Shayari : सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा

 

सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा।
हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिसताँ हमारा।।
सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा…

ग़ुरबत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन में।
समझो वहीं हमें भी, दिल हो जहाँ हमारा।।
सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा।

परबत वो सबसे ऊँचा, हमसाया आसमाँ का।
वो संतरी हमारा, वो पासबाँ हमारा।।
सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा।

गोदी में खेलती हैं, उसकी हज़ारों नदियाँ।
गुलशन है जिनके दम से, रश्क-ए-जिनाँ हमारा।।
सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा।

ऐ आब-ए-रूद-ए-गंगा! वो दिन है याद तुझको।
उतरा तेरे किनारे, जब कारवाँ हमारा।।
सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा।

मज़हब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना।
हिन्दी हैं हम वतन हैं, हिन्दोस्ताँ हमारा।।
सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा।

यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रूमा, सब मिट गए जहाँ से।
अब तक मगर है बाक़ी, नाम-ओ-निशाँ हमारा।।
सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा।

कुछ बात है कि हस्ती, मिटती नहीं हमारी।
सदियों रहा है दुश्मन, दौर-ए-ज़माँ हमारा।।
सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा।

‘इक़बाल’ कोई महरम, अपना नहीं जहाँ में।
मालूम क्या किसी को, दर्द-ए-निहाँ हमारा।।
सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा।

 

Hindi Desh Bhakti Shayari

Hindi Desh Bhakti Shayari

 

Deshbhakti Shayari | Sare Jahan se accha Hindositan hamar | Hindi Desh Bhakti Shayari

saare jahaan se achchha, hindostaan hamaara.
ham bulabulen hain isakee, yah gulisataan hamaara.
saare jahaan se achchha, hindostaan hamaara…

gurabat mein hon agar ham, rahata hai dil vatan mein.
samajho vaheen hamen bhee, dil ho jahaan hamaara.
saare jahaan se achchha, hindostaan hamaara…

parabat vo sabase ooncha, hamasaaya aasamaan ka.
vo santaree hamaara, vo paasabaan hamaara.
saare jahaan se achchha, hindostaan hamaara…

godee mein khelatee hain, usakee hazaaron nadiyaan.
gulashan hai jinake dam se, rashk-e-jinaan hamaara.
saare jahaan se achchha, hindostaan hamaara…

ai aab-e-rood-e-ganga! vo din hai yaad tujhako.
utara tere kinaare, jab kaaravaan hamaara.
saare jahaan se achchha, hindostaan hamaara…

mazahab nahin sikhaata, aapas mein bair rakhana.
hindee hain ham vatan hain, hindostaan hamaara.
saare jahaan se achchha, hindostaan hamaara…

yoonaan-o-misr-o-rooma, sab mit gae jahaan se.
ab tak magar hai baaqee, naam-o-nishaan hamaara.
saare jahaan se achchha, hindostaan hamaara…

kuchh baat hai ki hastee, mitatee nahin hamaaree.
sadiyon raha hai dushman, daur-e-zamaan hamaara.
saare jahaan se achchha, hindostaan hamaara…

iqabaal koee maharam, apana nahin jahaan mein.
maaloom kya kisee ko, dard-e-nihaan hamaara.
saare jahaan se achchha, hindostaan hamaara…

Desh Bhakti Shayari सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा

Hindi Desh Bhakti Shayari

 

 


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