Home कविता | Kavita सबसे प्राचीन छठी मईया की आरती | Chhathi Maiya Ki Aarti

सबसे प्राचीन छठी मईया की आरती | Chhathi Maiya Ki Aarti

by piyush Hindustani
Chhathi Maiya Ki Aarti

chhathi maiya ki Aarti: हिंदू पंचाग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठी मैया का पर्व महाछठ मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार छठी मइया भगवान सूर्य की बहन है। इसलिए महाछठ के इस पर्व के दिन भगवन सूर्य देव और उनकी बहन छट मैया की पूजा और छठी मईया की आरती की जाती है।

धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाछठ का यह व्रत संतान की प्राप्ति उसकी कुशलता और संतान की दीर्घायु की कामना के लिए किया जाता है। आज हम आपको बताएँगे की सबसे प्राचीन छठी मईया की आरती (Chhathi Maiya Ki Aarti) कौन सी है। जिसके बिना माँ की पूजा अधूरी मानी जाती है।

 


छठी मईया की आरती


 

जय छठी मैया…
ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥

जय छठी मैया…

ऊ जे नारियर जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥

जय छठी मैया…

अमरुदवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥

जय छठी मैया…

शरीफवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए॥
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥

जय छठी मैया…

ऊ जे सेववा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥

जय छठी मैया…

सभे फलवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥

जय छठी मैया…

छठी मईया की आरती


Chhathi Maiya Ki Aarti in English Font


 

Oo je kerwa je pharela khabad se, oha par suga madaraye
Marbo re sugwa dhanukh se, suga gire murjhaye
Oo je sugni je royele viyog se, adit hoyi na sahay

jay Chhathi maiya…

Oo je nariyar je pharela khabad se, ohi par suga medaraye
marbo re sugwa dhanukh se, suga gire murjhaye
Oo je sugni je royele viyog se, adit hoyi na sahay

jay Chhathi maiya…

Amarudwa je pharela khabad se, oh par suga medaraye
Marbo re sugwa dhanukh se, suga gire murjhaye
Oo je sugni je royele viyog se, adit hoyi na sahay

jay Chhathi maiya…

Sharifwa je pharela khabad se, oh par suga medaraye
Marbo re sugwa dhanukh se, suga gire murjhaye
Oo je sugni je royele viyog se, adit hoyi na sahay

jay Chhathi maiya…

Narangiya je pharela khabad se, oh par suga medaraye
Marbo re sugwa dhanukh se, suga gire murjhaye
Oo je sugni je royele viyog se, adit hoyi na sahay

jay Chhathi maiya…

Oo je sewua je pharela khabad se, oh par suga medaraye
Marbo re sugwa dhanukh se, suga gire murjhaye
Oo je sugni je royele viyog se, adit hoyi na sahay

jay Chhathi maiya…

Sabhe phalwa je pharela khabad se, oh par suga medaraye
Marbo re sugwa dhanukh se, suga gire murjhaye
Oo je sugni je royele viyog se, aadit hoyi na sahay

jay Chhathi maiya…

 


छठी मईया कौन हैं?

 

हिन्दू शास्त्रों और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार छठी मैया भगवान ब्रह्माजी की मानस पुत्री और भगवन सूर्य देव की बहन हैं। महाछठ का पर्व भगवन सूर्य देव की बहन छठी मैया को प्रसन्न करने के लिए मनाया जाता है। ब्रह्मवैवर्त पुराण में इस बात का उल्लेख मिलता है कि ब्रह्माजी ने सृष्टि रचने के लिए स्वयं को दो भागों में बांट दिया था। ब्रह्माजी के दाहिने भाग में पुरुष और बाएं भाग में प्रकृति का रूप सामने आया।

आपको बता दें की सृष्टि की रचना और उसका पालन पोषण करने वाली प्रकृति देवी ने अपने आप को छह भागों में विभाजित किया। इनके छठे अंश को सर्वश्रेष्ठ मातृ देवी या देवसेना के रूप में जाना जाता है। प्रकृति का छठा अंश होने के कारण इनका एक नाम षष्ठी है पड़ा जिसे आज छठी मैया के नाम से जाना जाता है।

 


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