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51+ काशी विश्वनाथ मंदिर के रोचक तथ्य | kashi vishwanath temple facts in hindi

by piyush Hindustani
काशी विश्वनाथ मंदिर के रोचक तथ्य

काशी विश्वनाथ मंदिर के रोचक तथ्य: काशी जिसे आज वाराणसी के नाम से जाना जाता है। इस नगरी को बाबा भोलेनाथ की सबसे प्रिय नगरी कहा जाता है। भगवान शिव की नगरी काशी का उल्लेख कई पुराणों और ग्रंथों में भी किया गया हैं। आपको बता दें की इसी काशी में ही भगवान शिव के प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग काशी विश्वनाथ स्तिथ है। काशी विश्वनाथ में बाबा भोलेनाथ शक्ति की देवी मां भगवती के साथ वाम रूप में विराजते हैं। आइए आज जानते है kashi vishwanath temple facts in hindi.

मौजूदा वाराणसी में स्थपित इस ज्योतिर्लिंग की हिन्दू धर्म में बहुत मान्यता है। पौराणिक मान्यताओं अनुसार काशी विश्वनाथ मंदिर यह मंदिर पिछले कई हजार वर्षों से वाराणसी में स्थित है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि एक बार इस मंदिर के दर्शन करने और पवित्र गंगा में स्‍नान कर लेने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। आइए आज जानते है काशी विश्वनाथ मंदिर के रोचक तथ्य (Facts About Kashi Vishwanath Temple)

 


काशी विश्वनाथ मंदिर के रोचक तथ्य

काशी विश्वनाथ मंदिर के रोचक तथ्य

काशी विश्वनाथ मंदिर के रोचक तथ्य


 

पौराणिक मान्यता है कि वाराणसी शहर भगवान शिव के त्रिशूल पर टिका हुआ है।

 

धार्मिक मान्यता है कि जब पृथ्वी का निर्माण हुआ तो सूर्य की पहली किरण काशी पर ही पड़ी थी।

 

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग दो भागों में बना है। ज्योतिर्लिंग के दाहिने भाग में शक्ति के रूप में मां भगवती विराजमान हैं और दूसरी ओर भगवान शिव वाम रूप (सुंदर) रूप में विराजमान हैं।

 

यहाँ देवी माँ भगवती के दाहिनी ओर विराजमान होने से केवल काशी में ही मुक्ति का मार्ग ही खुलता है।

 

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग में भगवन शिव और माँ शक्ति दोनों साथ ही विराजते हैं।

 

इस पूरी दुनिया में ऐसी कोई भी जगह नहीं है जहां भगवन शिव और माँ शक्ति एक साथ विराजमान हों और तंत्र द्वार भी हो।

 

काशी में बाबा विश्वनाथ गुरु और राजा दोनों के रूप में विराजमान है। बाबा दिनभर गुरु रूप में पूरी काशी में भ्रमण करते हैं। जब रात को नौ बजे बाबा विश्वनाथ का श्रृंगार कर आरती की जाती है तो वह राजा के भेष में होते हैं। इसीलिए तो भगवान शिव को राजराजेश्वर कहा जाता है।

 

बाबा विश्वनाथ का की एक नाम ही ईशान है।

 

बाबा विश्वनाथ और माँ भगवती काशी के प्रति प्रतिज्ञाबद्ध हैं। माता अन्नपूर्णा के रूप में काशी में रहने वालों प्रत्येक नागरिक का पेट भरती हैं। और बाबा विश्वनाथ मृत्यु के पश्चात तारक मंत्र देकर मनुष्य को मुक्ति प्रदान करते हैं। इसीलिए बाबा विश्वनाथ को ताड़केश्वर भी कहा जाता हैं।

 


kashi vishwanath temple facts in hindi

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काशी विश्वनाथ मंदिर को सोने का मंदिर भी कहा जाता है।

 

काशी विश्वनाथ मंदिर के गुंबद को सोने का बनाया गया है। पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह ने इसके लिए सोना दान में दिया था।

 

काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में मंडप और शिवलिंग है जो चांदी की चौकोर वेदी में स्थापित हैं।

 

यहाँ प्राण त्यागने के बाद मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है और उसे दोबारा मृत्युलोक में आने से मुक्ति मिल जाती है।

 

कहा जाता है कि भगवान शिव खुद यहां आकर तारक मंत्र देकर लोगों को तारते हैं।

 

धार्मिक मान्यता के अनुसार अकाल मृत्यु से मरा मनुष्य बिना शिव अराधना के मुक्ति नहीं पा सकता। लेकिन काशी आने मात्र से उसे मुक्ति मिल जाती है।

 

मंदिर के गर्भगृह में बाबा विश्वनाथ का ज्योतिर्लिंग ईशान कोण में मौजूद है। ईशान कोण का मतलब यह होता है की बाबा का ये दरबार संपूर्ण विद्या और हर कला से परिपूर्ण है।

 

काशी विश्वनाथ मंदिर के छत्र को बहुत चमत्कारी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अगर कोई भी भक्त इस छत्र के दर्शन करने के बाद बाबा से कुछ भी मांगे तो उसकी वो मनोकामना जरूर पूरी होती है।

 


Facts About Kashi Vishwanath Temple

Facts About Kashi Vishwanath Temple

Facts About Kashi Vishwanath Temple


 

हिन्दू धर्म में मान्यता है कि पवित्र नदी गंगा में स्नान करके काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

 

इस मंदिर परिसर में कालभैरव, भगवान विष्णु और विरूपाक्ष गौरी के भी मंदिर हैं।

 

काशी विश्वनाथ का यह मंदिर 15.5 मीटर ऊंचा है।

 

काशी विश्वनाथ मंदिर में भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए आदि शंकराचार्य, संत एकनाथ, रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, महर्षि दयानंद और गोस्वामी तुलसीदास भी यहाँ आये थे।

 

शिवरात्रि के दिन बाबा विश्वनाथ औघड़ रूप में पूरी काशी में विचरण करते हैं। कहा कहा जाता है की बाबा के बारात में भूत, प्रेत, देवता, जानवर और पक्षी सभी शामिल होते हैं।

 

बाबा विश्वनाथ दरबार में गर्भ गृह ही इसका का शिखर है। तंत्र-मंत्र की सिद्धि के लिए गर्भ गृह उपयुक्त स्थान है। इसलिए इसे श्री यंत्र-तंत्र साधना के लिए प्रमुख माना जाता है।

 

तंत्र की दृष्टि से बाबा विश्वनाथ के दरबार में चार प्रमुख द्वार इस प्रकार हैं… शांति द्वार,  कला द्वार, प्रतिष्ठा द्वार, निवृत्ति द्वार

 


काशी विश्वनाथ धाम के रोचक तथ्य

काशी विश्वनाथ धाम के रोचक तथ्य

काशी विश्वनाथ धाम के रोचक तथ्य


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